शीतल चन्दा अग्नि बन गए, कांटे बन गए फूल,
प्यार न करना कोई किसी से, प्यार है मन की भूल
मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहो हो,
मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे,
न जाने मुझे क्यूँ यक़ीं हो चला है,
मेरे प्यार को तुम मिटा न सकोगे
मेरी याद होगी जिधर देखोगे तुम,
कभी नग़्मा बनके, कभी बनके आँसू,
तड़पता मुझे हर तरफ़ पाआगे तुम,
शम्अ जो जलाई मेरी वफ़ा ने,
बुझाना भी चाहो, बुझा न सकोगे
कभी नाम बातों में आया जो मेरा,
तो बेचैन हो-हो के दिल थाम लोगे,
निगाहों में छाएगा ग़म का अँधेरा,
किसी ने जो पूछा सबब आँसुओं का,
बताना भी चाहो तो बता न सकोगे
मेरे दिल की धड़कन, बनी है जो शो'ला,*
सुलगते हैं अरमाँ, यूँ बनके आँसू,
कभी तो तुम्हें भी ये एहसास होगा,
मगर हम न होंगे तेरी ज़िन्दगी में,
भुलाना भी चाहो, भुला न सकोगे
मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहो हो,
मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे,
न जाने मुझे क्यूँ यक़ीं हो चला है,
मेरे प्यार को तुम मिटा न सकोगे
- मसरूर 'अनवर'
*- ये एक अन्तरा (Stanza) कामरान मेहदी ने लिखा है
(मेहदी हसन साहिब की पढ़ी गई मशहूर ग़ज़ल)
-मिनजानिबअख़लाक़
1 टिप्पणी:
बेहतरीन गज़ल है....लगे हाथ इसका ऑडियो भी चढा़ देते तो और मज़ा मिलता....लग रहा है आपकी वजह से मेहदी साहब के बारे में और बहुत सी जानकारियाँ मिलती रहेंगी....बहुत बहुत स्वागत है आपका......और ये वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें बहुत तक़लीफ़ देह है ये।
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