बुधवार, 6 अगस्त 2008

मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहे हो


शीतल चन्दा अग्नि बन गए, कांटे बन गए फूल,

प्यार न करना कोई किसी से, प्यार है मन की भूल

मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहो हो,

मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे,

न जाने मुझे क्यूँ यक़ीं हो चला है,

मेरे प्यार को तुम मिटा न सकोगे

मेरी याद होगी जिधर देखोगे तुम,

कभी नग़्मा बनके, कभी बनके आँसू,

तड़पता मुझे हर तरफ़ पाआगे तुम,

शम्अ जो जलाई मेरी वफ़ा ने,

बुझाना भी चाहो, बुझा न सकोगे

कभी नाम बातों में आया जो मेरा,

तो बेचैन हो-हो के दिल थाम लोगे,

निगाहों में छाएगा ग़म का अँधेरा,

किसी ने जो पूछा सबब आँसुओं का,

बताना भी चाहो तो बता न सकोगे

मेरे दिल की धड़कन, बनी है जो शो'ला,*

सुलगते हैं अरमाँ, यूँ बनके आँसू,

कभी तो तुम्हें भी ये एहसास होगा,

मगर हम न होंगे तेरी ज़िन्दगी में,

भुलाना भी चाहो, भुला न सकोगे

मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहो हो,

मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे,

न जाने मुझे क्यूँ यक़ीं हो चला है,

मेरे प्यार को तुम मिटा न सकोगे

- मसरूर 'अनवर'

*- ये एक अन्तरा (Stanza) कामरान मेहदी ने लिखा है

(मेहदी हसन साहिब की पढ़ी गई मशहूर ग़ज़ल)

-मिनजानिबअख़लाक़

मेहदी हसन साहिब


आवाज़ और अदायगी में ये सादगी और शालीनता किसी महान् गायक के पास ही हो सकती है, इतना महान् कि जिसे अपनी अज़मत क़ुबूल करने में हया आती है। लता ने क्या ही ख़ूब उपमा दी थी कि कि मेहदी साहिब को मैं रोज़ाना अलसुबह सुनती हूँ, उनकी आवाज़ में भगवान गाता है। मैं एक मामूली टीवी पत्रकार हूँ, सँगीत की गहरी क्या, सामान्य समझ भी नहीं रखता, लेकिन ये मेहदी ही हैं जिनका जादू दिलों को क़ाबू में कर लेता है। बता नहीं सकता कि कितनी ही बार मेहदी साहिब की एक-एक ग़ज़ल को कितनी हज़ार बार सुन चुका हूँ और सुनते रहना चाहता हूँ। दिल मेहदी हसन को गाता है। मेहदी साहिब बीमार हैं, मेरे साथ आप भी उनकी सेहतयाबी की दुआ करें। मेहदी साहिब का मानवता पर बड़ा अहसान है।
इस ब्लॉग में उनकी ग़ज़लों के ऑडियो और टेक्स्ट देने की कोशिश करूँगा। शायद कुछ हक़ अदा हो जाए।
-अख़लाक़ उस्मानी